Saturday, September 18, 2021
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पुलिस अधिकारी व विधायक जैसे प्रतिष्ठित लोगों के नाम साइबर ठगी करने वाले मथुरा के गिरोह का पर्दाफाश, छह गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के गोररखपुर जिले में पुलिस अधिकारी, विधायक, अधिवक्ता समेत 50 से अधिक लोगों की फेसबुक पर फर्जी आइडी बनाकर ठगी करने वाले गिरोह के छह सदस्यों को साइबर सेल टीम ने मंगलवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए सभी आरोपी मथुरा जिले के हैं। यह गिरोह पिछले पांच साल से सक्रिय था और अब जाकर पुलिस के हत्थे चढ़ा है। आरोपियों के पास से मोबाइल फोन व सिम कार्ड मिला है। पुलिस के अनुसार इन्होंने 80लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी ती है। इनके बैंक खाते भी खंगाले जा रहे हैं।

पुलिस के अनुसार कि नौ जुलाई, 2021 को सूचना मिली कि फेसबुक पर एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु की फर्जी आइडी बनाकरी जालसाज परिचितों से रुपये मांग रहे हैं। पुष्टि होने पर उन्होंने कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया। अपराधियों की पहचान के लिए साइबर सेल की टीम को लगाया गया । टीम ने छानबीन शुरू की तो पता चला कि मथुरा जिले के गोवर्धन थानाक्षेत्र के मडौरा गांव का रहने वाला गिरोह पहले फेसबुक, वाट्सएप पर फर्जी आईडी बनाता है और लोगों से मदद के नाम पर रुपये की मांग करता है। एसएसपी गोरखपुर के अलावा उन्होंने कैंपियरगंज विधायक फतेह बहादुर सिंह, सिविल कोर्ट के अधिवक्ता नीरज शाही समेत गोरखपुर के 50 से अधिक लोगों की फर्जी आईडी बनाकर ठगी की है।

आरोपियों की पहचान अंसार खान, साकिर खान, वहीद खान, कासिम खान के तौर पर हुई है। ये सभी ग्राम मडौरा थाना गोवर्धन जनपद मथुरा के निवासी हैं। इसके अलावा इस गैंग में दो नाबालिग भी पकड़े गए हैं। जालसाजों के पास से पुलिस ने पांच मोबाइल फोन और 8 सिम कार्ड भी बरामद किए हैं।

अपराध का तरीका
पुलिस के अनुसार आरोपियो ने बताया कि वे मोबाइल नंबर की सीरीज पकड़कर फेसबुक के लॉगिन पेज पर जाकर यूजर आईडी व पासवर्ड में इंटर करते थे। जिस आईडी का यूजर आईडी और पासवर्ड, मोबाइल नंबर, नाम या मोबाइल नम्बर के 6 अंक होते हैं, उसका फेसबुक लॉग इन करके हैक कर लेते थे। इसके बाद उसी आईडी से उनके फेसबुक फैंड्स से मदद के नाम पर गूगल पे, फोन पे, पेटीएम आदि के माध्यम से फर्जी वॉलेट और बैंक खातों में रुपये की मांग करते थे।

प्रतिष्ठित लोग थे निशाने पर
गिरोह के सदस्य नेता, पुलिस, व्यवसायी, प्रतिष्ठित लोगों की फेसबुक प्रोफाइल सर्च करके उनकी फोटो व नाम चुराते थे। इसके बाद वे फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर उनके जानने वालों को पहले फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते थे। फिर मदद के नाम पर फर्जी वॉलेट/ बैंक खातों में रुपये की मांग करते थे। ये लोग फेसबुक प्रोफाइल पर सर्च करके उनकी फोटो व नाम एवं कमेंट बाक्स, फ्रेंड लिस्ट आदि में से उनके दोस्तों के मोबाइल नंबर जान जाते थे। इसके बाद प्रोफाइल में फोटो व नाम को चुराकर व्हाट्सअप के डीपी पर उनकी फोटो लगाकर उनके दोस्तों से व्हाट्सअप चेटिंग कर मदद के नाम पर रुपये मांगते थे। इतना ही नहीं, ये सदस्य विभिन्न कम्पनियों में जॉब दिलाने, लाटरी आदि के नाम पर भी लोगों से उनका आधार कार्ड, पैन कार्ड, ओटीपी प्राप्त कर फर्जी डिजिटल अकाउंट खोलकर उसमें रुपये जमा कराते थे।

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