Thursday, January 20, 2022
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Covid-19 वैक्सीन सर्टिफिकेट को लेकर सरकार ने लोगों को चेताया, सोशल मीडिया पर शेयर करने की ना करें भूल

नई दिल्ली :कोरोना महामारी के बड़े संकट से दुनिया को निजात दिलाने के लिए वैज्ञानिकों ने अभूतपूर्व मेहनत की और महज एक साल में वैक्सीन लेकर आए। संक्रमण के आने के बाद लोग घरों में कैद हो गए। जीवन सामान्य होने के लिए वैक्सीन की दरकार थी, जो अब उपलब्ध है। भारत समेत दुनिया के कई देशों में टीकाकरण जारी है। देश में अब तक 83 लाख से ज्यादा लोगों का टीकाकरण हो चुका है। इस बीच सरकार ने चेतावनी जारी की है। वैक्सीन लगने के बाद मिल रहे सर्टिफिकेट को लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। सरकार ने इसी को लेकर लोगों को चेताया है।

सोशल मीडिया पर सर्टिफिकेट शेयर करके आप साइबर ठगी का शिकार हो सकते हैं। गृह मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस वाले ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया गया है। लोगों को इस सर्टिफिकेट को सोशल मीडिया पर शेयर न करने की बात कही गई है। ट्वीट में सर्टिफिकेट का एक सैंपल भी शेयर किया गया है। इसमें लिखा गया है,” सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने कोविड टीकाकरण प्रमाणपत्रो को पोस्ट/साझा करने और प्रोफाइल चित्र या स्टेटस पर डालने से बचें। इस प्रमाणपत्र में आपका नाम तथा अन्य व्यक्तिगत विवरण हैं एवं साइबर अपराधियों द्वारा आपको धोखा देने हेतु इसका दुरुपयोग किया जा सकता है। सतर्क रहें और साइबर सुरक्षित रहें।”

लोगों के बारे में जानकारी जुटाना आसान


लोगों को यह बात मालूम होनी चाहिए कि वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट में उनसे जुड़ी अहम जानकारियां हैं। इसमें व्यक्ति का नाम, जन्मतीथि और पता समेत अन्य जानकारियां हैं। सोशल मीडिया पर शेयर करने से इसका दुरुपयोग हो सकता है। यह सर्टिफिकेट भविष्य में बेहद काम आने वाला है। इसपर एक QR कोड दिया गया, जिसे स्कैन करने से वैक्सीन लगवाने वाले की पूरी जानकारी मिल जाएगी। साइबर अपराधी इस बात को जानते हैं कि सर्टिफिकेट पर उपलब्ध जानकारी शत प्रतिशत सही होगी। इससे लोगों के बारे में जानकारी जुटाना और उन्हें चूना लगाना काफी आसान होगा।

अमेरिका में भी चेतावनी जारी


बेटर बिजनेस ब्यूरो ने एक बयान में बताया कि विभिन्न देशों में जारी किए गए वैक्सीन कार्ड पर मौजूद लोगो की जानकारी का उपयोग साइबर क्रिमिनल द्वारा किया जा सकता है। ब्यूरो के अनुसार विशेष रूप से उन यूजर्स को खतरा है, जिन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट सेटिंग्स को प्राइवेट नहीं कर रखा है। यूएस फेडरल ट्रेड कमिशन ने भी इस संबंध में एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें लोगों से अपने टीकाकरण कार्ड की जानकारी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर नहीं शेयर करने को कहा गया है।

वैक्सीन के नाम पर लोगों को ठगने की कोशिश


साइबर ठग वैक्सीन के नाम पर लोगों को ठगने की कोशिश में पहले से ही हैं। हर कोई फर्जी कोविन ऐप के मामले से वाकिफ है। ऐप बनने से पहले ही इसके कई डुप्लीकेट ऐप प्ले स्टोर पर आ चुके थे। उस वक्त स्वास्थ्य मंत्रालय ने एडवाइजरी जारी करके लोगों को सचेत रहने की सलाह दी थी। मंत्रालय ने कहा कि इसे डाउनलोड न करें या अपनी व्यक्तिगत जानकारी न दें। इससे आप धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं।

देश में टीकाकरण जारी


बता दें कि देश में तीन जनवरी को कोरोना की दो वैक्सीन ऑक्सफोर्ड एक्सट्रजेनेका द्वारा विकसित वैक्सीन, जिसे पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कोविशिल्ड के नाम से बना रही है और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी गई। 16 जनवरी से टीकाकरण शुरू हुआ। लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज भी लगने लगी है। प्राथमिकता के आधार पर स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगाई जा रही है। अब तक 82 लाख 85 हजार 295 लोगों का टीकाकरण हो चुका है।

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