हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : आरोपी के Facebook या किसी भी सोशल मीडिया अकाउंट का लॉगिन-पासवर्ड नहीं ले सकती है पुलिस

क्राइम के मामले में पुलिस अब किसी भी आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट का लॉगिन और पासवर्ड अपने पास नहीं रख सकती है। यानी पुलिस या कोई भी जांच एजेंसी Facebook, Instagram, You Tube या किसी भी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म के लॉगिन-पासवर्ड को अपने पास सेव नहीं रख सकती है। इसके बजाय आरोपी के सामने ही किसी जरूरी जानकारी के लिए उसके सोशल मीडिया अकाउंट को जांच एजेंसी चेक कर सकती है। जरूरी जानकारी को डाउनलोड कर सकती है। लेकिन इसके बाद आरोपी को उसके सोशल मीडिया अकाउंट का लॉगिन-पासवर्ड चेंज करने का मौका देना होगा ताकि उसके अकाउंट का मिसयूज नहीं किया जा सके।

न्यूज चैनल के मैनेजिंग डायरेक्टर की याचिका पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने दिया फैसला

सोशल मीडिया को लेकर ये अहम फैसला 13 नवंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट ने दिया। एक न्यूज चैनल के मैनेजिंग डायरेक्टर राकेश शेट्टी की याचिका (Writ Petition) पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने ये फैसला दिया। जस्टिस सूरज गोविंदराज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि-

An investigating agency can not retain the user name and password of social media/disgital platform like Facebook and youtube pending investigation, the investigation agency can download the data required from such account and thereafter has to give back the changed credentials to the person who owns the said social media : Justice Suraj Govindraj

क्या है मामला और क्यों जाना पड़ा हाईकोर्ट 

दरअसल, याचिकाकर्ता राकेश शेट्टी का दावा है कि उनके न्यूज चैनल ‘पावर टीवी’ पर पिछले दिनों कर्नाटक के मुख्यमंत्री के परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पूरी सीरीज चलाई गई थी। जिसके बाद चैनल के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था। उसी केस को लेकर राकेश शेट्टी का आरोप है कि क्राइम ब्रांच ने उनके सभी सोशल मीडिया का लॉगिन और पासवर्ड ले लिया था। इसके बाद पुलिस ने उनके लॉगिन-पासवर्ड को चेंज भी कर दिया। जिसकी वजह से वो अपने सोशल मीडिया अकाउंट को एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। जिसके बाद कोर्ट ने क्राइम ब्रांच को 7 दिनों के भीतर लॉगिन आईडी और पासवर्ड देने का आदेश दिया।

कई बार जांच एजेंसी आरोपी के लॉगिन-पासवर्ड का करती है मिसयूज : एक्सपर्ट

इस बारे में रिटायर्ड पुलिस अधिकारी बताते हैं कि कई बार जांच एजेंसी किसी आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट का लॉगिन पासवर्ड लेकर उसका मिसयूज भी करती है। ऐसे मामले खासतौर पर उन लोगों के साथ होते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति काफी मजबूत होती है। लेकिन वो किसी मामले में आरोपी बन जाते हैं। ऐसे में कई बार कोई पुलिसकर्मी या जांच एजेंसी गिरफ्तारी के बाद तुरंत सोशल मीडिया का लॉगिन पासवर्ड लेकर जांच करती है और फिर आरोपी के जेल में जाने के बाद उसके पर्सनल डेटा को सेव कर लेते हैं। अगर कोई आपत्तिजनक वीडियो या कोई कंटेंट मिल गया तो उसे ब्लैकमेल भी करने लगते हैं। इसलिए हाईकोर्ट का ये फैसला कहीं भी जांच को प्रभावित नहीं करता है और बहुत ही जरूरी है।

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