Saturday, November 27, 2021
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सनसनीखेज खुलासा: फेसबुक ने 2019 आम चुनाव से पहले बनाई थी स्वैच्छिक आचार संहिता, चुनाव आयोग किया था राजी

फेसबुक (Facebook) के कुछ आंतरिक दस्तावेज लीक हुए हैं, जिससे कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इसमें सामने आया है कि भारत में 2019 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले फेसबुक ने चुनाव आयोग (ECI) के सख्त सोशल मीडिया नियमों से बचने के लिए स्वैच्छिक संहिता लागू की थी। यही नहीं उसने इसके लिए आयोग के अधिकारियों को भी राजी कर लिया था। यह खुलासा फेसबुक की पूर्व कर्मचारी फ्रांसेस हॉगन की ओर से सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों से हुआ है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इन दस्तावेजों में खुलासा हुआ है कि फेसबुक ने स्वैच्छिक आचार संहिता के लिए इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया(IAMAI) को आगे रखा था।

वहीं चुनाव आयोग के दस्तावेज के अनुसार वह चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर लगाम लगाने के लिए एक सख्त नियामक ढांचा चाहता था। इस खुलासे को लेकर चुनाव आयोग के प्रवक्ता ने कहा है कि हमें फेसबुक की आंतरिक रिपोर्ट को लेकर कोई जानकारी नहीं हैं, लेकिन अगर ऐसा दावा किया जा रहा है, तो यह सही नहीं है। किसी भी चुनाव में वोटिंग से 48 घंटे पहले ही सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर राजनीतिक विज्ञापन रोक होती है।

इसे लेकर मेटा(पहले फेसबुक) के प्रवक्ता ने हिंदुस्तान टाइम्स को एक ईमेल में इसे लेकर कि भारत में हम अकेले नहीं हैं, जिसने स्वैच्छिक आचार संहिता बनाई। चुनाव आयोग को इसके लिए मनाने वालों में अन्य सोशल मीडिया कंपनियां भी शामिल थीं।

जुलाई 2018 में सामने आया था नियामक ढांचा
चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगाम लगाने के लिए इस तरह का ढांचा बनाने के लिए तत्कालीन उप चुनाव आयुक्त उमेश सिन्हा के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया था। जुलाई, 2018 में इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश दी कि चुनाव आयोग सोशल मीडिया एजेंसियों को निर्देश दे कि वे यह सुनिश्चित करें कि मतदान से 48 घंटे पहले कोई भी राजनीतिक विज्ञापन अपलोड नहीं किया जाएगा।

फेसबुक ने अपने कर्मचारियों को मेमो दिया
इसके बाद 29 मई 2019 यानी आम चुनाव के पांच दिन बाद फेसबुक ने अपने कर्मचारियों को एक मेमो दिया। इसमें वह सब कुछ लिखा था जो फेसबुक ने चुनाव के दौरान किया। कंपनी ने कैसे सक्रिय निगरानी की और चुनाव आयोग द्वारा चयनित की गई सामग्री पर किस तरह से कार्रवाई की गई, यहां तक कि इस मेमो में स्वैच्छिक आचार संहिता तक का जिक्र था।

पर्याप्त नहीं स्वैच्छिक आचार संहिता
म्यूनिक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सहाना उडुपा और हार्वर्ड विवि के जॉन शोरेंस्टीन फेलो के अनुसार स्वैच्छिक आचार संहिता पर्याप्त नहीं है। यह काफी कमजोर है। इसको काफी लचीला बनाया गया है। उडुपा के अनुसार इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के माध्यम से चुनाव आयोग को बातचीत करके सोशल मीडिया कंपनी ने उसे स्वैच्छिक आचार संहिता के लिए राजी किया, क्योंकि वे किसी भी प्रकार के विरोध से बचना चाहती थी।

दबाव बनाने में कामयाब रहा फेसबुक
रिपोर्ट में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर नियामक ढांचा बनाने में लगने वाले वक्त के कारण फेसबुक चुनाव आयोग पर दबाव बनाने में कामयाब हुआ। उसने आयोग के अधिकारियों को स्वैच्छिक आचार संहिता के लिए राजी कर लिया। एक अधिकारी ने कहा कि संसद के माध्यम से नियामक ढांच के को एक कानून का रूप लेने में समय लगता, ऐसे में स्वैच्छिक आचार संहिता एक उचित विचार था। अधिकारी ने कहा कि हमारी प्राथमिकता शिकायतों का तेजी से समाधान और सोशल मीडिया कंपनियां चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करने को लेकर नियामक बनाने को थी।

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