Friday, May 27, 2022
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उत्तर प्रदेश : Fingerprint Cloning से लोगों को चूना लगाने वाले दो साइबर अपराधी गिरफ्तार, मऊ, गाजीपुर समेत कई जिलों में कर चुके हैं ठगी

आजमगढ़ : उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में साइबर थाने की पुलिस व स्वाट टीम ने रविवार को दो साइबर ठगों को गिरफ्तार किया। दोनों बिलरियागंज थाना क्षेत्र के उकारा गांव स्थित पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से साइबर क्राइम को अंजाम देते थे। ये बदमाश धोखे से लोगों की उंगलियों की क्लोन बनाकर गाढ़ी मशक्कत से कमाए धन से अपना खजना भरते थे। मऊ, गाजीपुर समेत कई जिलों में वारदात कर चुके साइबर बदमाशों के गिरोह का जड़ खंगलाने में पुलिस जुट गई है।

पुलिस गत 23 नवंबर को साइबर ठगों के पीछे हाथ धोकर पड़ी, जब रौनापार के चालाकपुर गांव निवासी मनोज कुमार सोनकर के बैंक में पड़े 1.77 लाख रुपये बदमाशों ने पार कर दिए। साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज हुआ तो पुलिस सक्रिय हो उठी। एसपी अनुराग आर्य ने एएसपी अपराध सुधीर जायसवाल को जिम्मेदारी सौंपते हुए साइबर मुख्यालय की मदद लेने को कहा तो बदमाशों पर शिकंजा कस गया।

वारदात करने वाले मनोज सरोज व उमेश सरोज निवासी ग्राम पटवध कौतुक थाना बिलरियागंज हत्थे चढ़ गए। मनोज ने बताया कि स्पाई कैमरा एवं मोबाइल फोन से ग्राहक सेवा केंद्रों में जाकर रजिस्टर में लगे अंगूठे की फोटो खींचने के साथ तहसीलों में जमा स्टांप पेपर से उनके अंगूठे का निशान, आधार कार्ड का डिटेल लेकर उंगलियों के क्लोन तैयार करते हैं। उसके बाद AEPS (आधार एनेबल पेमेंट सिस्टम) से क्लोन फिगर के जरिए आधार कार्ड से लिक बैंक खातों से रुपये निकाल लेते हैं।

बैंकिग साफ्टवेर से अपनी पहचान छिपाने को कंटेंट लेंस का प्रयोग करते हैं, ताकि हमारे आंख का रेटिना स्कैन करके ओरीजनल आधार कार्ड लिक न हो पाए। बदमाशों के पास से दो लैपटाप, फिगर प्रिट तैयार करने का उपकरण, तीन रबड़ सीट, सीट वाशिग केमिकल, बटर पेपर पर बने हुए फिगर प्रिट एवं प्लेन सीट, स्पाई कैमरा, छह रेटिना लेंस, तीन एक्टरनल हार्ड डिस्क, बने हुए फिगर प्रिट क्लोन, फर्जी प्रिट आधार कार्ड, तीन मोबाइल फोन, बुलेट बाइक, 13400 नकदी आदि बरामद हुए हैं।

AEPS, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया द्वारा विकसित एक पेमेंट टेक्नोलॉजी है जो लोगों को आधार नंबर और उनके फिंगरप्रिंट/आईरिस स्कैन की मदद से वैरिफिकेशन करके माइक्रो-एटीएम के जरिए कॅश देती है. इस ट्रांजेक्शन के लिए अपने बैंक अकाउंट की जानकारी देने की ज़रूरत नहीं होती. इस सिस्टम से लोग अपने आधार नंबर के माध्यम से एक बैंक अकाउंट से दूसरे बैंक में पैसों का आदान-प्रदान कर सकते हैं. इस ट्रांजेक्शन को अधिकृत करने के लिए खाताधारक के फ्रिंगरप्रिंट की जरूरत होती है.

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