Sunday, August 7, 2022
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क्या है Toolkit, जिसे ग्रेटा थनबर्ग ने किया था ट्वीट, दिल्ली पुलिस को क्यों है इसकी तलाश? जानें

नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस साइबर क्राइम सेल ने गुरुवार को किसानों के प्रदर्शन को लेकर टूलकिट (Toolkit) की मदद से फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया। दिल्ली पुलिस ने टूलकिट क्रिएटर्स के खिलाफ देशद्रोह, आपराधिक साजिश और घृणा को बढ़ावा देने के आरोप में एक एफआईआर दर्ज की, जिसे जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) द्वारा ट्विटर पर शेयर किया गया था। एफआईआर में ग्रेटा समेत किसी का नाम नहीं है, लेकिन स्पेशल सीपी (क्राइम ब्रांच) प्रवीर रंजन ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि टूलकिट पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन द्वारा बनाई गई है। उनका आरोप है कि यह खालिस्तानी समर्थक संगठन है। ग्रेटा ने यह ट्वीट बाद में डिलीट भी कर दिया। इसके अलावा खालिस्तान समर्थक एमओ धालीवाल का नाम इसमें सामने आ रहा है।

टूलकिट क्या है? What is Toolkit

मौजूदा समय में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आंदोलन हो रहे हैं। चाहे वह ब्लैक लाइव्स मैटर’ हो या अन्य कोई आंदोलन। इससे जुड़े लोग कुछ योजना बनाते हैं, जिसे एक्शन लिस्ट कहते हैं। यह आंदोलन को आगे बढ़ाने में काम आता है। जिस दस्तावेज में इन्हें दर्ज किया जाता है, उसे टूलकिट (Toolkit) कहते हैं। इसका इस्तेमाल सोशल मीडिया के संदर्भ में सबसे ज्यादा होता है। इसमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से लेकर सामूहिक प्रदर्शन तक की जानकारी होती है। हर सुनियोजित ढंग से होता है।

क्यों है चर्चा में?


टूलकिट हमारे बीच दशकों से मौजूद हैं। सोशल मीडिया के कारण ये आज के दौर में ये चर्चा में हैं। प्रदर्शन के मद्देनजर अगर बात करें तो टूलकिट का संदर्भ 2011 के ऑक्युपाई वॉल स्ट्रीट विरोध प्रदर्शनों, 2019 के हांगकांग विरोध प्रदर्शन दुनियाभर में कई जलवायु विरोध प्रदर्शन, भारत में सीएए के विरोध प्रदर्शन और जारी कृषि कानूनों के विरोध प्रदर्शन में पाया जा सकता है।

हांगकांग के विरोध प्रदर्शन के दौरान टूलकिट्स में प्रदर्शनकारियों को पहचाने जाने और आंसू गैस के गोलों से बचने के लिए मास्क पहनने और हेलमेट पहनने की सलाह दी गई। भारत में एंटी-सीएए विरोध के दौरान, एक टूलकिट में कौन से ट्विटर हैशटैग का उपयोग करना है का स्थान, किन जगहों पर विरोध प्रदर्शन करना है और यदि आप पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने पर क्या करना है इसे लेकर सुझाव दिए गए थे। ये टूलकिट व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर पर्सनल मैसेज के माध्यम से शेयर किया गया था।

ग्रेटा थनबर्ग की ओर से शेयर किए गए टूलकिट में क्या था?

  1. टूलकिट के पहले पेज पर सवाल था कि क्या आप मानव इतिहास के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन का हिस्सा होना चाहेंगे। कृषि कानूनों के विरोध में कब, कैसे और क्या करना है? इसकी पूरी जानकारी इस दस्तावेज के कई पेज पर दिया गया है।
  2. इसमें चार और पांच फरवरी को सुबह 11 बजे से लेकर दोपहर दो बजे तक प्रदर्शन को लेकर ट्विटर पर ज्यादा से ज्याद ट्वीट करने और प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता को कहा गया। इसके अलावा पांच और छह फरवरी को फोटो और वीडियो मैसेज पोस्ट करने को कहा गया था। 21 से 26 फरवरी के बीच भी ऐसा ही करने को कहा गया।
  3. 13 फरवरी को भारतीय दूतावास, मीडिया हाउस या स्थानीय सरकार के ऑफिस के बाहर विरोध प्रदर्शन का आयोजन करने के लिए कहा गया।
  4. टूलकिट में 26 जनवरी के दिन का भी जिक्र था। इसी दिन दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान लाल किला के पास उपद्रव मचा था।
  5. प्रदर्शन के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान चलाने की बात कही गई। उद्योगपतियों मुकेश अंबानी और गौतम अदाणी की कंपनियों के उत्पादों के बहिष्कार करने की अपील भी की गई।

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