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साइबर फ्रॉड मामले में गुरुग्राम में 3 बैंक मैनेजर गिरफ्तार, ठगों के साथ मिलकर लोगों को ऐसे लगाते थे चूना

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साइबर फ्रॉड मामले में गुरुग्राम में 3 बैंक मैनेजर गिरफ्तार, ठगों के साथ मिलकर लोगों को ऐसे लगाते थे चूना

गुरुग्राम पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी में शामिल होने के संदेह में एक निजी बैंक की एमजी रोड शाखा के तीन प्रबंधकों सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान मोहित राठी (25), महेश कुमार (27), विश्वकर्मा मौर्य (26) और हयात (23) के रूप में की गई है।

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (साइबर) सिद्धांत जैन के अनुसार जांच में एक चिंताजनक पैटर्न सामने आया। हयात बैंक कर्मचारी नहीं है। उसने कथित तौर पर फैसिलिटेटर के तौर पर काम किया। कोटक महिंद्रा बैंक में कार्यरत तीन प्रबंधकों से बैंक खाते के जानकारी प्राप्त किए और उन्हें साइबर फ्रॉड गैंग के मास्टरमाइंड को दे दिया।

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2,000 बैंक खाते खोलने का संदेह

डीसीपी जैन ने बताया, “तीनों आरोपी बैंक मैनेजर पिछले सात महीने से बैंक में काम कर रहे हैं। इस अवधि के दौरान उन पर लगभग 2,000 बैंक खाते खोलने का संदेह है।” अधिकारियों का आरोप है कि बैंक प्रबंधकों ने हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर के निवासियों को उनके नाम से नए बैंक खाते खोलने के लिए मनाने के लिए भ्रामक रणनीति अपनाई। ये व्यक्ति संभवतः यह बात नहीं जानते थे कि बैंक खाता किट का उपयोग साइबर धोखाधड़ी गिरोह द्वारा अवैध उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इस किट में खाता संख्या, डेबिट कार्ड और पिन जैसी महत्वपूर्ण जानकारी शामिल होती हैं।

कैसे जांच शुरू हुई

नवंबर 2023 में मानेसर साइबर अपराध पुलिस स्टेशन में एक गुरुग्राम निवासी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू हुई। शिकायतकर्ता ने एक फर्जी कॉल प्राप्त करने की सूचना दी। उससे कहा गया कि उसका बेटा अस्पताल में भर्ती है और उसके इलाज के लिए रकम ट्रांसफर करने का अनुरोध किया गया है। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं।

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एफआईआर दर्ज

शिकायत के आधार पर त्वरित कार्रवाई की गई। एक एफआईआर दर्ज की गई और चार व्यक्तियों को 21 और 26 फरवरी 2024 के बीच गिरफ्तार कर लिया गया। उनके कब्जे से दो मोबाइल फोन जब्त किए गए। डीसीपी जैन ने कहा, ” हम फिलहाल आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं और उनके द्वारा खोले गए सभी बैंक खातों की जानकारी इकट्ठा करने का प्रयास किया जा रहा है।”

भारत में साइबर धोखाधड़ी के बढ़ता खतरा

यह घटना भारत में साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे को रेखांकित करती है और ऐसे मामलों के खिलाफ सार्वजनिक जागरूकता और सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देती है। यह भविष्य में इसी तरह की घटनाओं को रोकने के लिए बैंकिंग क्षेत्र के भीतर मजबूत सुरक्षा उपाय करने के महत्व पर भी प्रकाश डालता है।

बैंकिंग प्रणाली के भीतर खामियां उजागर

यह मामला बैंकिंग प्रणाली के भीतर खामियों, ग्राहक की संवेदनशील  जानकारी की सुरक्षा के लिए सख्त नियमों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर सवाल उठाता है। आगे की जांच से धोखाधड़ी वाली गतिविधियों की पूरी जानकारी सामने आने की संभावना है और संभावित रूप से धोखाधड़ी में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान हो सकेगी।

बचाव का तरीका

  • बैंक डिटेल्स किसी से भी शेयर न करें।
  • ओटीपी शेयर न करें। बैंक से जुड़ा अधिकारी कभी ओटीपी नहीं मांगता।
  • किसी से पासवर्ड शेयर न करें।
  • अगर फ्रॉड का शिकार हों तो नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के नंबर 1930 पर कॉल करें।

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