Sunday, October 17, 2021
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फिल्म ‘आंखें’ की तरह ऑनलाइन बैंक फ्रॉड करने वाले अंधे साइबर क्रिमिनल को देख रह जाएंगे दंग, देखें वीडियो

Cyber Crime News : सुपर स्टार अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार की फिल्म ‘आंखें’ शायद आपने देखी होगी। इस फिल्म में अंधे की अक्षय कुमार और परेश रावल कैसे दिनदहाड़े एक बैंक को लूट लेते हैं। फिल्म में भले इसे दिखाया गया लेकिन आप सोचते होंगे कि ऐसा असल में होना शायद संभव नहीं। लेकिन उत्तर प्रदेश के मथुरा का रहने वाला एक क्रिमिनल अंधा है लेकिन वो मोबाइल फोन पर कोई भी नंबर आसानी से डायल करके पिछले कुछ सालों में लाखों की ठगी को अंजाम दे चुका है। फोन पर खासतौर पर किसी भी अंजान नंबर फोन कर उसे ‘पहचाना नहीं क्या’ वाले तरीके से किसी कॉलर को पहले जाल में फंसाता था और फिर अपने सगे भाई की मदद से QR कोड या लिंक भेजकर ठगी को अंजाम देता था। यूपी की आगरा साइबर थाने की पुलिस ने अंधे और उसके भाई दोनों को 4 मार्च को गिरफ्तार कर लिया।

फोन पर कहता था, पहचाना नहीं क्या? देखिए फ्रॉड करने के तरीके को LIVE

पकड़े गए दोनों भाई शहजाद और तौफीक हैं। दोनों मथुरा के रहने वाले हैं। तौफीक अंधा है और देख नहीं सकता है। पुलिस ने जब इसे गिरफ्तार किया तो गांव के लोग भी हैरान रह गए क्योंकि किसी को भरोसा ही नहीं हुआ कि अंधा भी भला कैसे बैंक फ्रॉड को अंजाम दे सकता है। लेकिन पूछताछ के दौरान पुलिस ने उससे लाइव ठगी को अंजाम देने को कहा तो उसने एक सीरीज नंबर को डायल कर एक शख्स को ठगी का शिकार बनाने का प्रयास करते हुए दिखाया भी। जिसे देखकर पुलिस और पब्लिक की आंखें खुली रह गईं।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी को बनाया था ठगी का शिकार

यूपी साइबर क्राइम एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि दोनों भाई अपने तीन अन्य साथियों से मिलकर पिछले काफी समय से साइबर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। एसपी साइबर क्राइम ने बताया कि ये दिन में OLX पर सामान खरीदने के बहाने क्यूआर कोड भेजकर ठगी करते थे। इसके अलावा फेसबुक पर लोगों की डिटेल चुराकर उनका दोस्त या रिश्तेदार बनकर भी पैसे मांगते थे। इसके अलावा जो तौफीक है उसे कई राज्यों के मोबाइल नंबर के शुरुआती 4 डिजिट की पूरी सीरीज याद है। इस आधार पर अंदाजा लगाता हुए किसी भी नंबर को डायल कर कॉलर से कहता था कि पहचाना नहीं क्या। इसके बाद कोई ना कोई बहाना बनाकर वो झांसे में ले लेता था और फिर इमरजेंसी बताकर पैसे ठग लेता था। हाल में इसने गृह मंत्रालय के एक सेक्शन ऑफिसर से भी ठगी की थी।

नौकरी दिलाने तो कभी दूसरे बहाने भी करते थे ठगी

इस केस का खुलासा करने वाले आगरा साइबर क्राइम थाने के प्रभारी राजेश शर्मा और सब इंस्पेक्टर चेतन भारद्वाज ने बताया कि ये गैंग फर्जी सिमकार्ड और नकली आधार के जरिए बैंक खाता भी खुलवा लेते थे। गैंग मेंबर शाहरूख दूसरे एरिया में जाकर एटीएम से पैसे निकालकर ले आता था। इसके बदले उसे 20 फीसदी कमीशन मिलता था। पुलिस ने बताया कि ये गैंग दिन में यमुना नदी के किनारे झाड़ियों में छिपकर जालसाजी करते थे और पुलिस की जानकारी मिलने पर राजस्थान या हरियाणा की तरफ भाग जाते थे। इसलिए जल्दी पकड़ में नहीं आते थे।

Sunil Maurya
Deputy Editor. The420.in I am an Investigative Journalist. I Have Authored a Book on Aarushi-Hemraj murder mystery-कातिल जिंदा है, एक थी आरुषि. Earlier I was Producer in Zee News DNA Team, I Have Worked for several leading publications like Nav Bharat Times, Dainik Bhaskar, Dainik Jagran, Sahara

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